А¤ёа¤°аґќа¤µа¤¶аґќа¤°аґ‡а¤·аґќа¤ А¤®аґѓа¤№а¤®аґќа¤®а¤¦ А¤°а¤«а¤јаґђ А¤•िशഋर А¤•ഃमार А¤іа¤¤а¤ѕ А¤®а¤‚गഇशकर А¤№а¤їа¤‚दഐ А¤—ासഇ А¤•ഇ 2019 - А¤єаґѓа¤°а¤ѕа¤ёаґ‡ А¤¦аґѓа¤– А¤•аґђ А¤¬а¤ѕа¤¤ 90's А¤ёа¤¦а¤ѕа¤¬а¤№а¤ѕа¤° Apr 2026
यह पोस्ट 90 के दशक और उससे पहले के उन सदाबहार गानों का एक खूबसूरत संग्रह है, जो आज भी हमारे दिल के सबसे करीब हैं। जब बात दर्द भरे या 'Sad Songs' की आती है, तो इन तीन दिग्गजों की आवाज़ का कोई मुकाबला नहीं:
जहाँ किशोर दा अपनी मस्ती के लिए जाने जाते थे, वहीं उनके 'Melancholy' (उदासी) वाले गाने अकेलेपन के सबसे अच्छे साथी हैं।
रफी साहब की आवाज में वो कशिश थी जो रूह को छू लेती थी। उनके उदास गानें सिर्फ संगीत नहीं, बल्कि एक अहसास हैं। 'शीशा हो या दिल हो'
'लुका छुपी', 'शीशा हो या दिल हो', और 'लग जा गले'।
'क्या हुआ तेरा वादा', 'दिन ढल जाए', और 'ओ दुनिया के रखवाले'। 'दिन ढल जाए'
'chingari koi bhadke', 'मेरे नैना सावन भादो', और 'घुंघरू की तरह बजता ही रहा हूँ'।
90 के दशक का संगीत अपनी सादगी और बेहतरीन शायरी (Lyrics) के लिए जाना जाता है। उस समय के गाने सिर्फ सुने नहीं, बल्कि महसूस किए जाते थे। 'सदाबहार' शब्द इन गानों पर बिल्कुल सटीक बैठता है क्योंकि ये समय की कसौटी पर खरे उतरे हैं। 'मेरे नैना सावन भादो'
दीदी की आवाज में वो ठहराव और दर्द था जो आँखों में आँसू ला देता था। 90 के दशक में भी उन्होंने कई यादगार गमगीन गाने दिए।